मलमल के आँचल से अपने, सूर्य की की किरनों को ढपना
मेघ जो बरसो कहीं भी, आठों पहर तुम बरसना
खनक गर्जन में हँसी की, बिजली सी मुस्कान लिए
सुकोमल पैरों से छत पे, टप टप की थाप दिए
हो व्यथित ना ह्रदय कोई, तन मन में उल्लास भरना
मेघ जो बरसो कहीं भी, आठों पहर तुम [...]
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